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Tuesday, 25 April 2017

उर्दु से नफ़रत करने वालों जरुर पढ़ो,

सुनिए

उर्दु जबान से नफरत तो देखिये कि जब 13 अप्रैल को उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह अकादमिक सत्र 2018-19 के बाद से मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए संयुक्त परीक्षा नीट में उर्दू को एक भाषा के तौर पर शामिल करें, तो कुछ लोगों के खुन सुखने लगे और उनसे बहुत बहस भी हुई, उनहोंने यहाँ तक कहा कि उर्दु मुसलमानों की भाषा है अथवा पाकिस्तानियों की भाषा है।

मैं उन तमाम लोग जो उर्दु के प्रति ऐसी जहीनियत रखते हैं उनसे कहना चाहता हूँ कि उर्दू मुख्य रूप से भारत की जबान है। यहीं यह पैदा हुई और पली-बढ़ी। अंग्रेजों ने यहां आकर अंग्रेजी चलाई और धीरे-धीरे अंग्रेजी मुख्य भाषा बनी। इससे पहले उर्दू आम बोलचाल, व्यापार-कारोबार की भाषा थी। पहले हिंदू और सिक्ख भी उर्दू का उतना ही इस्तेमाल करते थे जितना कि और लोग। हाँ यह सच है कि भारत के अलावा यह पाकिस्तान में भी बोली जाती है क्योंकि आज का पाकिस्तान भी कभी भारत हुआ करता था। दूसरी ओर दुनिया में कई इस्लामिक देश हैं लेकिन उर्दू वहां की भाषा नहीं है। वहां उर्दू सिर्फ वे लोग बोलते हैं जो मुख्यत: भारत या पाकिस्तान से नौकरी-रोजगार के लिए जाते हैं। उन देशों के नागरिक न तो उर्दू बोलते हैं और न इसे सीखने में उनकी कोई दिलचस्पी है तो बताओ उर्दु कैसे मुसलमान हो गई ?

क्या आपको पता है कि उर्दू ही वह ज़ुबान है जिसने अंग्रेजों को सबसे पहले बुलंद आवाज में ललकारा और मौलाना मोहम्मद बाक़ीर को पैदा किया, हाँ वही मौलाना मोहम्मद बाक़ीर जो देश के पहले और शायद आखिरी पत्रकार थे जिन्होंने 1857 में स्वाधीनता के पहले संग्राम में अपने प्राण की आहुति दी थी। मौलाना साहब अपने समय के बेहद निर्भीक पत्रकार रहे थे। वे उस दौर के लोकप्रिय ‘उर्दू अखबार दिल्ली’ के संपादक थे,. दिल्ली और आसपास अंग्रेजी साम्राज्यवाद के खिलाफ जनमत तैयार करने में इस अखबार की बड़ी भूमिका रही थी। मौलाना साहब अपने अखबार में अंग्रेजों की विस्तारवादी नीति के विरुद्ध और उनके खिलाफ लड़ रहे सेनानियों के पक्ष में लगातार लिखते रहे। अंग्रेजों ने उन्हें बड़ा ख़तरा मानकर गिरफ्तार किया और सज़ा-ए-मौत दे दी थी। उन्हें तोप के मुंह पर बांध कर उडा दिया गया जिससे उनके वृद्ध शरीर के परखचे उड़ गए थे।

और आज तुम उसी उर्दु से नफ़रत करते हो, तो सुनिए आप जैसों के लिए ही अकबर इलाहाबादी का एक बेहतरीन शेर है ।

यही फ़रमाते रहे ‘तेग़’ से फैला है इस्लाम,
ये ना इरशाद हुआ ‘तोप’ से क्या फैला है ??

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