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Tuesday, 25 April 2017

बहुसंख्यक समुदाय में एक से अधिक शादी वाले लोग अधिक हैं।

कितने ऐसे लोग हैं जो किसी ऐसे मुस्लिम वयक्ति को जानते हैं जिन्होंने चार पत्नियां रखी हैं ? मेरे ख्याल से कोई भी नहीं होगा, दरअसल हकीकत में भी एक से अधिक पत्नी रखने वालों में बहुसंख्यक वर्ग के लोग आगे हैं, आपको उस समय की जनसंख्या के आंकड़े पेश कर रहा हूँ जब ये तीन तलाक़ एंव महिला अधिकार के बारे में कोई हलचल नहीं थी,
वर्ष 1960 में की गई जनसंख्या गणना के मुताबिक़ भारतीय मुस्लिमों की तुलना में हिंदुओं ने एक से ज्यादा पत्नी रखने की प्रथा को बढ़ावा दिया है। उस वक्त के दर्ज आंकड़े बयां करते हैं कि एक से ज्यादा बीवियां रखने के मामले में आदिवासी 15.25, बौद्ध 7.9, हिंदू 5.80 और भारतीय मुस्लिम 5.78 फीसदी थे। इन आंकड़ों पर गौर करने पर साफ जाहिर होता है कि भारतीय मुस्लिमों में चार शादियां जायज होने के बाद भी वे एक पत्नी की प्रथा का पालन करने में सबसे आगे रहे हैं। वहीं, अगर आदिवासियों के आंकड़ों को हिंदुओं की प्रतिशत से जोड़ दिया जाए तो वह 21.05 फीसदी का आंकड़ा छू लेता है। यानी एक से ज्यादा पत्नी रखने के मामले में हिंदुओं ने मुस्लिमों को काफी पीछे छोड़ रखा है। इसके बाद से अबतक कोई भी सम्पुर्ण आंकड़ा पेश नहीं हुआ है, वजह तो आप समझ ही गए होंगे की इन आंकड़ों में कितनी वृद्धि हुई होगी।
लेकिन इसपर किसी मिडिया या किसी सियासतदानों की कभी बोली नहीं निकली, आखिर क्यों ?

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