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Tuesday, 25 April 2017

भांड मिडिया, पढिए पुरा लेख।

"भांड मिडिया "

एक युग था जब घर के बड़े बुजुर्ग देश और दुनिया की खबरों से अवगत होने के लिए समाचार पत्रों एंव आकाशवाणी पर निर्भर थे, ये वो समय था जब अखबार के नाम पर कुछ ही नाम प्रसिद्ध थे जो प्रकाशित होते थे वहीं आज पुरे देश में अलग-अलग भाषाओं में हजारों की संख्या में अखबार प्रकाशित होते हैं, आकाशवाणी पर भी समाचार के लिए सुबह 8 बजे एंव रात्री 8 बजे का समय होता था वहीं आज इलैक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से देश और दुनिया की सारी खबरें लाइव आप तक पहूंच जाती है, परंतु क्या सच में भारत में इलैक्ट्रॉनिक मीडिया ने अपना कर्तव्य बखुबी निभाया है ? लोकतंत्र का ये चौथा खंभा निष्पक्षता पर कितना खरा रहा है, आइए देखते हैं।

मेरा मानना है कि भारत मे मीडिया का सीधा अर्थ है कि ब्राहमन
की कलम, ब्राह्मणों की ही जबान और बनियों की पूँजी अर्थात धन्नासेठों और संघियों का गठजोड़। मतलब की देश का मिडिया पुरी तरह ब्राह्मणों की कठपुतली है और ब्राह्मणवादी विचारधारा पर आधारित इसकी नीँव भी। आज सुदर्शन न्युज के संपादक सुरेश च्वहाणके की गिरफ्तारी की खबर लगभग पुरी तरह वायरल है, सुरेश चव्हाणे जो की एक संघी हैं, इनका चैनल क्या समाचार प्रसारित करता है यह किसी से छिपा नहीं है। ये शख्स खुलेआम अपने को संघ का कार्यकर्ता बोलता है और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यक्रम को आगे बढ़ाता है। घोषित रूप से संघ और विश्व हिन्दू परिषद का घोर समर्थक यह चैनल खुलेआम मोदी और सरकार का समर्थक खुद को कहता है , मोदी विरोधियों को खुलेआम गाली भी देता है। ऐसा नहीं है की चौव्हाणके को पहली बार गिरफ्तार किया गया है, इससे पहले अपने स्टूडियो के केबिन में बने बेडरूम में खूफिया कैमरे लगवाकर महिलाओं का यौन उत्पिड़न करने और फिर उस वीडियो से उनको ब्लैकमेल करके उन्हें आसाराम के कुपुत्र नारायण साईं को "भोग प्रसाद" के रूप में भेजने का संगीन आरोप भी लग चुका है, उसके आफिस में वह खूफिया कैमरे लगवाने वाली ही उसकी 6 वर्ष तक सेक्रेटरी रही महिला ने ही पुलिस में यह एफआईआर दर्ज कराई थी कि वह उससे मिलने आने वाली महिलाओं को अपनी बातों से और तंत्र-मंत्र से सम्मोहित करके उनसे अपने "लिंग" की पूजा कराता था और फिर उनका यौन शोषण करता था। सुदर्शन न्यूज चैनल की उस वरिष्ठ महिला मीडियाकर्मी के यौन शोषण और उत्पीड़न के मामले में नोएडा पुलिस ने करीब दस दिन की देरी के बाद एफआईआर दर्ज किया था, उस महिला ने अपने फेसबुक पर यह अपडेट भी किया था की "सुदर्शन न्यूज़ में किया जाता है महिलाओं का शारीरिक शोषण चेयरमैन सुरेश चव्हाणके द्वारा, धर्म के नाम पर चलाई जा रही है दुकान , आप सबसे न्याय की प्राथना कर रही हूं. कब तक ऐसे ढोंगी लोग समाज में यह घिनौने अपराध करते रहेंगे।''
न्याय का पैमाना देखिये की उस समय पकड़े जाने के बाद सुरेश चोहाणके ने उसे हिन्दुत्व पर हमला बता दिया था। और फिर वो खुला घुमता रहा। जरा सोचिए देश की मिडिया में बैठे ब्राह्मणवादी संधियों द्वारा समाचार चैनल की आड़ में क्या किया जाता है, सरल भाषा में इसे कोठा चलाना ही तो कहेंगे ना ?

ऐसा नहीं है की सुदर्शन न्युज ही अकेला इन सब कैटिग्री में शामिल है, निचे लिखे निम्न चैनलों , उनके मालिकों एवं उनके कार्यों को देखिये ।

●  इंडिया टुडे के अरुण पूरी के स्वामित्व वाली टीवी टुडे के ग्रुप में , आजतक , हेडलाईन टुडे , तेज़ , बिजनेस टुडे , दिल्ली आजतक और अब इंडिया टुडे चैनल। यह चैनल घोर चाटुकारता के स्तर को पार कर चुका है और संघ तथा सरकार को प्रसन्न करने के लिए ऐन्टिक इस्लामिक बहस और खबर चलाने में तत्पर रहता है , डाक्टर ज़ाकिर नाईक प्रकरण पर यह उनके टाईम्स नाऊ को ₹500/= करोड़ की मानहानि का नोटिस दिये जाने तक लगभग 15 दिन प्राईमटाईम पर उनपर बहस चलाता रहा और गालीगलौज कराता रहा। संघ और उसके आतंकवादी कार्यक्रम पर खबरें इसे नहीं मिलतीं। सरकार के विरुद्ध बोलने की हिम्मत नहीं क्युँकि फिर "पतांजली" के प्रचार मिलना बंद हो जाएँगे।

●  ₹3404/= करोड़ के व्यापार के साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाला टीवी-18 ग्रुप के पास सीएनबीसी- टीवी18 , सीएनबीसी-टीवी-18 प्राईम एचडी , सीएनबीसी-आवाज , सीएनबीसी-बाज़ार , सीएनएन-न्यूज-18 , आईबीएन-7 , आईबीएन लोकमत , इटीवी उर्दू, इटीवी-हरियाणा हिमाचल प्रदेश , इटीवी मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ , इटीवी-बिहार झारखंड , इटीवी- बंगला , इटीवी-उड़ीसा ,इटीवी न्यूज-कन्नड़ , इटीवी न्यूज-केरला , इटीवी न्यूज-तमिलनाडु , इटीवी न्यूज-आसाम , इटीवी न्यूज- गोवा , न्यूज-18 पंजाब , न्यूज-18 जे•के•। इसके अतिरिक्त मनोरंजन के , तमाम चैनल जैसे कलर टीवी , कलर एचडी , रिश्ते , रिश्ते- सिनेप्लेक्स , एमटीवी इंडिया , एमटीवी-एचडी जैसे कम से कम 50 क्षेत्रीय भाषाओं के चैनल हैं।
भारत के प्रधानमंत्री की पीठ पर देश का यह एकमात्र उद्धोगपति जब हाथ रखता है तो इसकी पत्नी का हाथ प्रधानमंत्री के हाथों में होता है। संघ भाजपा और सरकार का एजेंडा चलाने का कार्य कर रहे इस मीडिया समूह के बारे में इससे अधिक कुछ कहने की आवश्यकता नहीं। इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम करते इसकी 6 बजे से 9 बजे तक चलने वाली बहसें और उसके पैनल में बैठे लोग अंबानी के प्रधानमंत्री के पीठ पर रखे हाथ को चरितार्थ करते हैं।

● सुभाष चंद्रा के स्वामित्व और सूधीर चौधरी के सीइओ वाली ₹ 551 करोड़ के व्यापार वाले ज़ी समूह के अंतर्गत , ज़ी न्यूज-हिंदी , ज़ी न्यूज-इंग्लिश , ज़ी बिजनेस-हिंदी , ज़ी बिजनेस-इंग्लिश , इसके अतिरिक्त ज़ी न्यूज प्रादेशिक के अंतर्गत 18 चैनल अलग अलग प्रदेशों के नाम से हैं। इसके अतिरिक्त तमाम मनोरंजन चैनल जिनकी संख्या कम से कम 25 है।
संघ का घोषित समर्थक यह चैनल । इसका मालिक भाजपा का राज्यसभा सदस्य है , इसका सीईओ और तिहाड़ी पत्रकार सुधीर चौधरी सरकार की चाटुकारता के लिए किसी परिचय का मोहताज नहीं। खबरों को चलाने और ना चलाने की ₹100/= करोड़ की डील करते इन्हें दुनिया ने देखा है। इसी कारण अपराधिक मुकदमा के आरोप में तिहाड़ जेल की हवा खाए इस सीईओ महोदय को मोदी सरकार वाई श्रेणी की सुरक्षा दे रही है।

● नोएडा के सेक्टर 85 में 2•9 एकड़ में फैले रजत शर्मा के स्वामित्व वाले इंडिया टीवी का वार्षिक व्यापार ₹700/= करोड़ का है।
रजत शर्मा घोषित रूप से पतांजली और बाबा रामदेव के हाथों बिके हुए हैं और उनके कृपापात्र रहे हैं। उनके प्रसारण किसके उद्देश्य को पूरा करते हैं यह भी बताने की आवश्यकता नहीं। कभी निष्पक्षता का प्रतीक रहा "आपकी अदालत" दर्शकों की तालियाँ बजाकर महिमामंडन करने के लिए अपने आकाओं को कटघरे में बुलाता है। मोदी सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से पुरस्कृत यह पत्रकार अपने चैनल पर पत्रकारिता धर्म का प्रतिदिन बलात्कार करता है।

● टाइम्स नाऊ , अंग्रेजी समाचार चैनल है जिसमें अरनब गोस्वामी टाइम्स नाऊ के मुख्य संपादक हैं और सुनील लुल्ला वर्तमान सीईओ हैं जो कि एक फिल्म निर्माता हैं।
प्रधानमंत्री और सरकार की चापलूसी करते सभी सीमाओं को पार कर गये पत्रकार अर्नब गोस्वामी "राज ठाकरे" जैसे लोगों से ठीक रहते हैं क्युँकि इनका हेडक्वार्टर मुम्बई में है। सरकार और संघ के उद्देश्यों को पूरा करता टाम्स नाऊ किस तरह ओछेपन का प्रदर्शन करता है यह डाक्टर ज़ाकिर नाईक प्रकरण से समझ गए होंगे  जब कि उनको लगातार आतंकवादी बता रहे अर्नब गोस्वामी की पत्रकारिता ₹500/= करोड़ के मानहानि की नोटिस मिलते ही डाक्टर ज़ाकिर नाईक की प्रशंसा में उबल पड़ी थी। फट्टू

● न्यू डेलही टेलीविजन नेटवर्क अर्थात एनडीटीवी , मार्क्सवादी नेता प्रकाश करात के साढ़ू और पत्रकार प्रनव राय और उनकी पत्नी राधिका राय के स्वामित्व वाली कंपनी है जिसके सीईओ विक्रम चंद्रा हैं। दो वर्ष पहले इस चैनल ग्रुप की शुद्ध कमाई ₹576/= करोड़ की थी। इस ग्रुप में एनडीटीवी-24×7 , एनडीटीवी-इंडिया , एनडीटीवी- प्राफिट , एनडीटीवी-गुड टाईम , एटीएन-एनडीटीवी-24×8 , एनडीटीवी-वर्ड वाईड।
कुछ हद तक पत्रकारिता के मापदंडों पर चलता यह मीडिया ग्रुप सरकार के डर से बहुत से विषयों और समाचारों को खा जाता है। और हर चैनलों की तरह संघ तथा सरकार की सीधी आलोचना से बचते हुए शेष मुद्दों पर इमानदार रहता है। सच यह भी है की मुस्लिमों से संबंधित समाचार कितना भी महत्वपूर्ण हो यह मीडिया समूह भी कभी-कभी दोगलापन दिखाता है। प्रचार के लिए इसे भी कंपनियों की कृपा चाहिए तो यह भी उनके काले कारनामों पर अधिकतर चुप ही रहता है।

● न्यूज़ 24 , अनुराधा प्रसाद के स्वामित्व वाला न्यूज चैनल है जो कि केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद की बहन हैं। पूर्व पत्रकार सांसद और आईपीएल के चेयरमैन तथा कांग्रेस के नेता राजीव शुक्ला अनुराधा प्रसाद के पति हैं। इस चैनल के शाम 7:30 बजे से नियमित प्रसारित कार्यक्रम संघ प्रायोजित होते हैं। शेष सभी प्रसारण भी संघ द्वारा निर्धारित मुद्दे पर ही होती है और समाज में कटुता फैलाना , इस्लाम को बदनाम करना इस चैनल का प्रमुख कार्य है। पत्रकारिता के मूल सिद्धांत से बहुत दूर इस चैनल पर आप अंधविश्वास को फैलाते तमाम कार्यक्रम देख सकते हैं। कभी कभी तो हारर फिल्मों से भी अधिक हारर रिपोर्टिंग होती है।

● एबीपी (न्यूज) का पूरा अर्थ है आनंद बाजार पत्रिका , जो भारत का एक बड़ा समाचार पत्र समूह है , अंग्रेजी का प्रसिद्ध अखबार "द टेलीग्राफ" भी इसी समूह का समाचार पत्र है। इसके मालिक अवीक सरकार हैं तथा इन्हीं अवीक सरकार की बेटी चिकी सरकार देश की पहली फोन पब्लिशर हैं। उनकी नई कंपनी जैगरनट है। जिसमें इंफोसिस के पूर्व सीईओ नंदन निलेकणी, फैब इंडिया के एमडी विलियम बिसेल समेत कई अरबपतियों ने पैसा लगाया है। एबीपी न्यूज के भी तमाम प्रादेशिक चैनल हैं।
यह चैनल भी शुद्ध रूप से संघ नियंत्रित चैनल है जो सरकार तथा मोदी की आलोचना से बचता है। बेटी उद्योगपति जो है। अनजान पत्रकारों का झुंड पैनल डिबेट में बुलाकर यह चैनल भाजपा के लिए चुनाव से पहले सर्वे कराकर माहौल बनाने के लिए बदनाम करता रहा है। इसी लिए कभी करोड़ों की डील भी इस चैनल के लिए चर्चा में रही है जिसमें ₹45/= करोड़ के साथ इसी चैनल के एक अधिकारी को गिरफ्तार किया गया था । इस खबर को सरकारी एजेंसियों द्वारा ही दबा दिया गया था........

आप सुरेश च्वहाणके की गिरफ्तारी पर खुश तो हैं परंतु इन सारी सत्यता से बेखबर हैं, पत्रकारिता के कुछ उसुल होते हैं और वह उसुल है की किसी धर्म , किसी सरकार , किसी व्यक्ति , किसी समाज , किसी भी व्यवस्था , किसी भी औद्योगिक घराने और यहाँ तक कि खुद के देश के प्रति भी निरपेक्ष रहना, जो की आज के दौर में टीआरपी, चाटुकारता और अधिक से अधिक स्लाट बेचने का धंधा बन चुका है। किसी भी संस्थान को चलाने के लिए धन भी आज आवश्यक है परन्तु पत्रकारिता के उसुलों को बेचकर ही धन प्राप्त करना आज सभी मीडिया समूहों का मुख्य उद्देश्य है। और इसमें केवल सुदर्शन न्युज की नहीं बल्कि सारे न्युज चैनलों की किसी न किसी रूप में भागीदारी है। अब आप ही बताएं की मिडिया को मिडिया कहना सही रहेगा या कोठा ?

आखिर में: काश की मिडिया अपने उसुलों पर चलकर पत्रकारिता का धर्म निभाए तो भारत में भेदभाव से लेकर दंगे-फसाद पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा। मैं मिडिया से एक ही बात कहना चाहूँगा की ...

"शक्ति का तू स्रोत है, वाणी में तेरी ओज है
लोक के इस तंत्र का तू एक महान स्तंभ है
भूल अपने स्वार्थ को फिर देश का निर्माण कर
लोगों के मन में नया फिर से तू ही विश्वास भर"

शुक्रिया

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